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गंगा ढाबा

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इंटेलेक्चुअलनुमा शोधार्थियों से लेकर राजनीतिक बहसबाजों, प्रेमीजनों,और किसिम-किसिम के फाकामस्तों की शरणस्थली है जे.एन.यू. का गंगा ढाबा -- स्वाद को ठेंगा दिखाती चाय और दुःसाध्य पराठों के बावजूद !
Updated: 13 hours 13 min ago

लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)