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Protest against Continued State Repression on Anti-POSCO People’s Movement

हस्तक्षेप - Wed, 22/05/2013 - 10:36
Protest against Continued State Repression on Anti-POSCO People’s Movement  Odisha Bhawan, 1 Niti Marg, Chanakyapuri, New Delhi    11 am, 24th May (Friday), 2013    In the continuum of brutal attacks on the struggle against forcible land acquisition for a POSCO steel plant in Odisha, the most recent case of repression has been the unlawful [...]

समय की माँग है वामपन्थी दलों की एकता

हस्तक्षेप - Wed, 22/05/2013 - 10:04
डॉ. गिरीश   देश के मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक हालात ऐसे हो गये हैं कि आज के सभी वामपन्थी दल राष्ट्रीय क्षितिज पर एकजुट होकर देश के राजनीतिक विकल्प के रूप मे अपने को प्रदर्शित करें तो इसमे कोई शक नहीं कि उनकी अतीत की खोई हुयी ताकत का एहसास भी फिर से हो [...]

तीसरा मोर्चा की पालकी ढोने पर आमादा क्यों हैं वामदल

हस्तक्षेप - Wed, 22/05/2013 - 09:21
अगर वामदल सचमुच एक प्रगतिशील विकल्प तैयार करना चाहते हैं तो इसके लिये अव्वल तो उन्हें एक युवा नेतृत्व तैयार करना होगा और दूसरे टीवी स्टूडियो से बाहर निकलकर आम जनता के बीच दोबारा पहुँचना होगा। याद करके देखिए कि ए.बी. वर्धन के बस्तर प्रवास को छोड़कर वाम मोर्चे के किस नेता की किसी हिन्दी भाषी प्रदेश में हाल के वर्षों में कोई बड़ी आमसभा हुयी हो!!

वन अधिकार कानून पर हिमाचल में बन रहे बड़े आन्दोलन के आसार

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 23:10
कुलभूषण उपमन्यु   हिमाचल प्रदेश में वन अधिकार कानून 2006 को लागू करने में जानबूझ कर जल विद्युत परियोजनाओं व वन विभाग के दबाव के कारण किये जा रहे विलम्ब व संवैधानिक अवहेलना को ले कर हिमालय नीति अभियान 24-25-26 मई को शाई रोपा, बन्जार, कुल्लू में देशव्यापी सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस [...]

मारुति-सुजुकी मजदूरों के हक में उठीं देश भर से आवाज़ें

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 22:32
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. नई दिल्ली/ लुधियाना। मारुति-सुजुकी मजदूरों के हक में जहाँ राजधानी दिल्ली में 19 मई से ही हरियाणा भवन पर विरोध प्रदर्शनो का सिलसिला जारी है वहीं पंजाब के कई संगठनों ने हरियाणा के उद्योग मन्त्री [...]

एक कम्युनिस्ट का गैर वामपंथी आकलन

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 21:30
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. उज्ज्वल भट्टाचार्य   वामपंथी दलों की एकता समय की माँग – क्रान्ति स्वर नामक ब्लॉग में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के यूपी राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने एक लेख लिखा है। वामपंथियों की एकता समय [...]

यूपी को गुजरात बनाने के यज्ञ में आहुतियाँ जारी,खालिद के वकील पर हमले की निन्दा

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 20:54
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डॉ. असगर अली इंजीनियर की विरासत

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 18:07
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code.  इरफान इंजीनियर   मेरे जीवन में मानो एक तूफान आया और सब कुछ खत्म हो गया। मुझे जो क्षति हुयी है, उससे मैं अब तक समझौता नहीं कर सका हूँ। तूफान की तरह, मौत भी [...]

दिग्विजय सिंह के नाम से सुलगते क्यों हो

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 17:40
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. शेष नारायण सिंह   कर्नाटक में भाजपा की हार के बाद उस हार के कारणों का विश्लेषण अब एक कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है एक नये विश्लेषक भी मैदान में हैं। शिवसेना के [...]

मेरठ में कमेला मुद्दे में क्यों कूद रहे देवबंद के उलेमा?

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 17:00
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. सलीम अख्तर सिद्दीकी मेरठ में कमेला लम्बे अरसे से सियासत का अखाड़ा बना हुआ है। इसके संचालकों ने इसे बचाये रखने के लिये राजनीति को कवच के तौर पर इस्तेमाल किया, जिसमें वह कामयाब होते [...]

मैं खोज रहा हूँ भाषा

मैं तो बस देखता रहा 
तुम्हारा चेहरा 
तुम्हे पढता रहा 
पता चला तुम्हे 
क्या पढ़ा मैंने 
तुम्हारे चेहरे पर ?

कुछ वक्त दो 
मैं खोज रहा हूँ भाषा 
तुम्हे प्रेम पत्र लिखूंगा ....

मैंने पहचान लिया है खुद को ....

तुम्हारे पक्ष में 
मैंने नही की बात 
यही गुनाह किया है 
दरअसल मैंने कुछ देर से 
पहचाना तुम्हारा चेहरा 
नकाब उतारने में 
कुछ वक्त लगा है मुझे 

इसलिए नही दोहराया 
मैंने अपनी गलती को 
तुम्हे अफ़सोस है मेरी बेवफाई पर
पर मुझे संतोष है
तुम्हारे साथ -साथ
मैंने पहचान लिया है खुद को ....

फैजाबाद में गुण्डई, खालिद के वकील पर जानलेवा हमला

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 16:35
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. फैजाबाद से खबर आ रही है कि गुण्डई करते हुये खालिद मुजाहिद के वकील एडवोकेट जमाल अहमद के सहयोगी एडवोकाट सलीम अहमद पर अभी थोड़ी देर पहले जानलेवा हमला किया गया है। बताया जाता है [...]

गर्म हवायें..

अज़दक - Tue, 21/05/2013 - 14:19
( दादुशिन की चिरतकारी) अबे, कितनी गरमी है, अच्‍छे आदमी, हैं? की आवाज़ लगाता, धम्‍म से चार सैकेंड के लिए घास पर निढाल गिरकर, और फिर उतनी ही प्रवीण तत्‍परता से देह खुजाते मैंने जुसेप्‍पे को ख़बरदार किया.

टखने, पिंडलियां, जांघ के भीतरी हिस्‍से, पीठ, गर्दन, कान के निचले, बाहरी किनारे, कनपटी, माथा, ओह, खुजावन के कितने केंद्र थे, और उन सभी केंद्रों तक खरखराती उंगलियों के ब्‍लेड को घुमाने का कैसा अनूठा, सेंसुअस परमानन्‍द था! गरमी का तो था ही. अलसाया, चार कदम पीछे टहलता, लगा-लगा जुसेप्‍पे भी आकर घास पर मेरे बाजू बैठ गया.

“जैतपुर, श्रावंती, देहुना, बलराजनगर क्‍या टोहेंगे ऐसी गर्मी में, कहीं एसी वाले होटल में कमरा लेकर दो दिन पहले हवा खाते हैं, ऐं, क्‍या कहते हो? तुमको निकलना हो तो निकलो, मैं तो आगे चलने से बाज आया?” मैंने इत्तिला की और आंखें मूंद देह-खुजावन के रक्तिम अनुच्‍छेदों में वापस लौट गया.

“अपने को देखकर तुम्‍हें शर्म नहीं आती?” एक उचक्‍के किस्‍म के मुरझाये, बुढ़ाये, पत्रहीन गाछ को देखते जुसेप्‍पे ने ऐसे खोये स्‍वर में कहा मानो मुझसे नहीं, पत्रहीन गाछ व प्रकृति से संवाद कर रहा हो.

“तुमको दया नहीं आती?” चिढ़कर मैंने जवाब दिया, “मुझे गुस्‍सा आता है. किसी दिव्‍यपुरुष की तरह छै बाहुधारी होता तो सोचो, खुजलाने का कितना महीन, मार्मिक आनन्‍दलोक होता.. तुम रेसपेक्‍टफुली एड्रेस करते, पड़ोस में रक्‍ताभ व रक्‍तवर्णी नहीं, वास्‍तविक रक्‍तनदी बहती होती, औरतें माथे पर आंचल व गोद में स्‍टील की थाली लिए चढ़ावा चढ़ाने पंक्तिबद्ध खड़ी मिलतीं.. खरखराती, डोलती आवाज़ में तलत महमूद भजन गाते मिलते, हैं?”

जुसेप्‍पे ने एक पत्रहीन गाछ से नज़र हटाकर एक अन्‍य पर गाड़ लिया, दोनों के बीच जैसे पत्रहीनता की कोई मलिन प्रतियोगिता चल रही हो. मेरे भीतर है नहीं, अगर होती, दया, तो अपने टखनों की जगह, जाकर कुछ देर के लिए पेड़ के खुजा आता, उसकी जगह जबकि, जुसेप्‍पे की ही खुजाता रहा, “जुसे, ये समय और इतिहास की कैसी त्रासदियां है, यार, टैक्‍सास में भी गरमी पड़ती है, ओसाका में किमोनो और चेहरे के आगे बेना लहराता मैं सड़क पार करता गरमी की शिकायत करता होता, यहां ‘जली घास पर घंटा भर’ वाली कविता बुनने की क्‍यों कर रहा हूं, हैं?”

पत्रहीन गाछ से नज़र फेरकर व घास पर टिकी कुहनी को गिराकर जुसेप्‍पे ने एक आह भरी, आंखें मूंद पीठ के बल लम्‍बलेट हो गया, कुछ क्षणों के अंतरालोपरांत अपनी शिकायत दर्ज़ की, “पता नहीं मुझे ज्ञानकोश की तरह बरतने की तुम्‍हारी यह गंदी आदत कब जायेगी..”

“कभी जाएगी?” मैंने चिल्‍लाकर त्‍वरित उत्‍तर दिया.

“और हर तीसरे घंटे पर अंदाज़ के दिलीप कुमार की तरह मुंह लटकाकर दुखी होने की..”

“मगर जीवन में इतना दुख क्‍यों है, जुसे,” मैंने एकदम से छूटकर कहा, “गरमी तो ख़ैर है ही?”
जुसेप्‍पे ने छूटकर जवाब नहीं दिया. दरअसल नहीं ही दिया.

थोड़ी देर तक उम्‍मीद बनाये रखने के बाद फिर मैंने भी हार मान ली, छाती पर हाथ बांधे, आंखें मूंद ली और जुसेप्‍पे के सानिध्‍य में ठहरी हवाओं के न आते झोंकों का गरम-गरम आनन्‍द मार्मिकता से महसूसने लगा..

जाकिर अली रजनीश को बॉब्स पुरस्कार

लेखक मंच - Tue, 21/05/2013 - 12:47

जाकिर अली रजनीश

नई दि‍ल्‍ली : ब्लॉग के आस्कर कहे जाने वाले जर्मनी के अन्तर्राष्ट्रीय ‘डॉयचे वेले बॉब्स पुरस्कार 2013‘ की घोषणा हो गयी है। इनमें ‘हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉ्ग’ का पुरस्कार ‘तस्लीम’ (http://www.scientificworld.in) को तथा ‘सबसे रचनात्मक‘ ब्लॉग का पुरस्कार ‘सर्प संसार‘ (http://snakes.scientificworld.in) को प्रदान किया गया है। ये दोनों पुरस्कार यूजर च्वाइस श्रेणी के अन्तर्गत प्रदान किये गये हैं। यह जानकारी डायचे वेले की अधिकारिक वेबसाइट ‘दा बॉब्स डॉट कॉम’ पर दी गयी है। साइट के अनुसार पुरस्कार वितरण जर्मनी के बॉन शहर में होगा। वहाँ पर 18 जून को ग्लोबल मीडिया फोरम द्वारा आयोजित समारोह में विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

बॉब्स के अनुसार 03 अप्रैल से चल रही ऑनलाइन वोटिंग में 94 हजार से अधिक वोट पड़े थे, जिनमें ‘तस्लीम‘ एवं ‘सर्प संसार‘ को अपनी-अपनी श्रेणी में क्रमश: 62 और 45 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं। चर्चित रचनाकार और विज्ञान संचारक डॉ. जाकिर अली रजनीश इन ब्लॉगों के मॉडरेटर हैं और वैज्ञानिक जागरूकता के प्रचार-प्रसार के लिए इन ब्लॉगों का संचालन करते हैं। उन्होंने बताया कि विश्‍व की 14 भाषाओं में दिया जाने वाला बॉब्स अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार कुल 6 श्रेणियों में दिया जाता है और इन पुरस्कारों में हिन्दी भाषा को पहली बार शामिल किया गया है।

डॉ. रजनीश ने बताया कि हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग से नवाजा गया ‘तस्लीम’ ब्लॉग मूलतः एक गैर सरकारी संस्था है, जो वैज्ञानिक चेतना के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करती है। यह संस्था अब तक विज्ञान ब्लॉग लेखन कार्यशाला, विज्ञान कथा कार्यशाला, राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं अन्तर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित करा चुकी है। उन्होंने बताया कि ‘सर्प संसार‘ एक ऐसा ब्लॉग है, जिसमें साँपों से जुड़ी जानकारियों को रोचक ढंग से प्रकाशित किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से साँपों के व्यवहार, उनकी आदतों पर रोशनी डाली जाती है और उनसे जुड़े अंधविश्‍वासों से पर्दा उठाया जाता है।

प्रस्तुतिः अर्शिया अली, कोषाध्यक्ष, तस्लीम

देशद्रोही हैं संविधान को नकार कर पूँजीवादी नीतियाँ चलाने वाले – जस्टिस सच्चर

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 11:09
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. सोशलिस्ट पार्टी का द्विवार्षिक राष्टीय अधिवेशन बीते 17-18 मई 2013 को त्रिवेन्द्रम, केरल, में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने अपने उद्घाटन भाषण में पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुये कहा [...]

APCR strongly condemns the suspicious custodial killing of Maulana Khalid Mujahid by U.P. police

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 10:26
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Arasmetta in Bastar : Yet another ‘encounter’ killing

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 09:55
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. New Delhi. Jamia Teachers’ Solidarity Association(JTSA) and Adivasi Adhikar Rashtriya Manch (AARM) condemned the brutal killing of eight adivasis, including three children, in Arasmetta  village in Bastar district in Chattisgarh. The Adivasi Adhikar Rashtriya Manch [...]

The Siddharamaiah Circus!!!

हस्तक्षेप - Tue, 21/05/2013 - 09:39
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खालिद हत्याकाण्ड : दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की माँग ने पकड़ा जोर

हस्तक्षेप - Mon, 20/05/2013 - 23:13
Your ads will be inserted here byGoogle AdSense.Please go to the plugin admin page to set up your ad code. नई दिल्ली/ लखनऊ। कल तक जिन अखबारों के लिये खालिद मुजाहिद की हत्या मुख पृष्ठ की खबर नहीं थी अचानक आज उन अखबारों के पहले पन्ने पर न केवल 42 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा [...]
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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)