Feed aggregator
Protest against Continued State Repression on Anti-POSCO People’s Movement
समय की माँग है वामपन्थी दलों की एकता
तीसरा मोर्चा की पालकी ढोने पर आमादा क्यों हैं वामदल
वन अधिकार कानून पर हिमाचल में बन रहे बड़े आन्दोलन के आसार
मारुति-सुजुकी मजदूरों के हक में उठीं देश भर से आवाज़ें
एक कम्युनिस्ट का गैर वामपंथी आकलन
यूपी को गुजरात बनाने के यज्ञ में आहुतियाँ जारी,खालिद के वकील पर हमले की निन्दा
डॉ. असगर अली इंजीनियर की विरासत
दिग्विजय सिंह के नाम से सुलगते क्यों हो
मेरठ में कमेला मुद्दे में क्यों कूद रहे देवबंद के उलेमा?
मैं खोज रहा हूँ भाषा
तुम्हारा चेहरा
तुम्हे पढता रहा
पता चला तुम्हे
क्या पढ़ा मैंने
तुम्हारे चेहरे पर ?
कुछ वक्त दो
मैं खोज रहा हूँ भाषा
तुम्हे प्रेम पत्र लिखूंगा ....
मैंने पहचान लिया है खुद को ....
मैंने नही की बात
यही गुनाह किया है
दरअसल मैंने कुछ देर से
पहचाना तुम्हारा चेहरा
नकाब उतारने में
कुछ वक्त लगा है मुझे
इसलिए नही दोहराया
मैंने अपनी गलती को
तुम्हे अफ़सोस है मेरी बेवफाई पर
पर मुझे संतोष है
तुम्हारे साथ -साथ
मैंने पहचान लिया है खुद को ....
फैजाबाद में गुण्डई, खालिद के वकील पर जानलेवा हमला
गर्म हवायें..
टखने, पिंडलियां, जांघ के भीतरी हिस्से, पीठ, गर्दन, कान के निचले, बाहरी किनारे, कनपटी, माथा, ओह, खुजावन के कितने केंद्र थे, और उन सभी केंद्रों तक खरखराती उंगलियों के ब्लेड को घुमाने का कैसा अनूठा, सेंसुअस परमानन्द था! गरमी का तो था ही. अलसाया, चार कदम पीछे टहलता, लगा-लगा जुसेप्पे भी आकर घास पर मेरे बाजू बैठ गया.
“जैतपुर, श्रावंती, देहुना, बलराजनगर क्या टोहेंगे ऐसी गर्मी में, कहीं एसी वाले होटल में कमरा लेकर दो दिन पहले हवा खाते हैं, ऐं, क्या कहते हो? तुमको निकलना हो तो निकलो, मैं तो आगे चलने से बाज आया?” मैंने इत्तिला की और आंखें मूंद देह-खुजावन के रक्तिम अनुच्छेदों में वापस लौट गया.
“अपने को देखकर तुम्हें शर्म नहीं आती?” एक उचक्के किस्म के मुरझाये, बुढ़ाये, पत्रहीन गाछ को देखते जुसेप्पे ने ऐसे खोये स्वर में कहा मानो मुझसे नहीं, पत्रहीन गाछ व प्रकृति से संवाद कर रहा हो.
“तुमको दया नहीं आती?” चिढ़कर मैंने जवाब दिया, “मुझे गुस्सा आता है. किसी दिव्यपुरुष की तरह छै बाहुधारी होता तो सोचो, खुजलाने का कितना महीन, मार्मिक आनन्दलोक होता.. तुम रेसपेक्टफुली एड्रेस करते, पड़ोस में रक्ताभ व रक्तवर्णी नहीं, वास्तविक रक्तनदी बहती होती, औरतें माथे पर आंचल व गोद में स्टील की थाली लिए चढ़ावा चढ़ाने पंक्तिबद्ध खड़ी मिलतीं.. खरखराती, डोलती आवाज़ में तलत महमूद भजन गाते मिलते, हैं?”
जुसेप्पे ने एक पत्रहीन गाछ से नज़र हटाकर एक अन्य पर गाड़ लिया, दोनों के बीच जैसे पत्रहीनता की कोई मलिन प्रतियोगिता चल रही हो. मेरे भीतर है नहीं, अगर होती, दया, तो अपने टखनों की जगह, जाकर कुछ देर के लिए पेड़ के खुजा आता, उसकी जगह जबकि, जुसेप्पे की ही खुजाता रहा, “जुसे, ये समय और इतिहास की कैसी त्रासदियां है, यार, टैक्सास में भी गरमी पड़ती है, ओसाका में किमोनो और चेहरे के आगे बेना लहराता मैं सड़क पार करता गरमी की शिकायत करता होता, यहां ‘जली घास पर घंटा भर’ वाली कविता बुनने की क्यों कर रहा हूं, हैं?”
पत्रहीन गाछ से नज़र फेरकर व घास पर टिकी कुहनी को गिराकर जुसेप्पे ने एक आह भरी, आंखें मूंद पीठ के बल लम्बलेट हो गया, कुछ क्षणों के अंतरालोपरांत अपनी शिकायत दर्ज़ की, “पता नहीं मुझे ज्ञानकोश की तरह बरतने की तुम्हारी यह गंदी आदत कब जायेगी..”
“कभी जाएगी?” मैंने चिल्लाकर त्वरित उत्तर दिया.
“और हर तीसरे घंटे पर अंदाज़ के दिलीप कुमार की तरह मुंह लटकाकर दुखी होने की..”
“मगर जीवन में इतना दुख क्यों है, जुसे,” मैंने एकदम से छूटकर कहा, “गरमी तो ख़ैर है ही?”
जुसेप्पे ने छूटकर जवाब नहीं दिया. दरअसल नहीं ही दिया.
थोड़ी देर तक उम्मीद बनाये रखने के बाद फिर मैंने भी हार मान ली, छाती पर हाथ बांधे, आंखें मूंद ली और जुसेप्पे के सानिध्य में ठहरी हवाओं के न आते झोंकों का गरम-गरम आनन्द मार्मिकता से महसूसने लगा..
जाकिर अली रजनीश को बॉब्स पुरस्कार
जाकिर अली रजनीश
नई दिल्ली : ब्लॉग के आस्कर कहे जाने वाले जर्मनी के अन्तर्राष्ट्रीय ‘डॉयचे वेले बॉब्स पुरस्कार 2013‘ की घोषणा हो गयी है। इनमें ‘हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉ्ग’ का पुरस्कार ‘तस्लीम’ (http://www.scientificworld.in) को तथा ‘सबसे रचनात्मक‘ ब्लॉग का पुरस्कार ‘सर्प संसार‘ (http://snakes.scientificworld.in) को प्रदान किया गया है। ये दोनों पुरस्कार यूजर च्वाइस श्रेणी के अन्तर्गत प्रदान किये गये हैं। यह जानकारी डायचे वेले की अधिकारिक वेबसाइट ‘दा बॉब्स डॉट कॉम’ पर दी गयी है। साइट के अनुसार पुरस्कार वितरण जर्मनी के बॉन शहर में होगा। वहाँ पर 18 जून को ग्लोबल मीडिया फोरम द्वारा आयोजित समारोह में विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
बॉब्स के अनुसार 03 अप्रैल से चल रही ऑनलाइन वोटिंग में 94 हजार से अधिक वोट पड़े थे, जिनमें ‘तस्लीम‘ एवं ‘सर्प संसार‘ को अपनी-अपनी श्रेणी में क्रमश: 62 और 45 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं। चर्चित रचनाकार और विज्ञान संचारक डॉ. जाकिर अली रजनीश इन ब्लॉगों के मॉडरेटर हैं और वैज्ञानिक जागरूकता के प्रचार-प्रसार के लिए इन ब्लॉगों का संचालन करते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व की 14 भाषाओं में दिया जाने वाला बॉब्स अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार कुल 6 श्रेणियों में दिया जाता है और इन पुरस्कारों में हिन्दी भाषा को पहली बार शामिल किया गया है।
डॉ. रजनीश ने बताया कि हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग से नवाजा गया ‘तस्लीम’ ब्लॉग मूलतः एक गैर सरकारी संस्था है, जो वैज्ञानिक चेतना के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करती है। यह संस्था अब तक विज्ञान ब्लॉग लेखन कार्यशाला, विज्ञान कथा कार्यशाला, राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं अन्तर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित करा चुकी है। उन्होंने बताया कि ‘सर्प संसार‘ एक ऐसा ब्लॉग है, जिसमें साँपों से जुड़ी जानकारियों को रोचक ढंग से प्रकाशित किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से साँपों के व्यवहार, उनकी आदतों पर रोशनी डाली जाती है और उनसे जुड़े अंधविश्वासों से पर्दा उठाया जाता है।
प्रस्तुतिः अर्शिया अली, कोषाध्यक्ष, तस्लीम
देशद्रोही हैं संविधान को नकार कर पूँजीवादी नीतियाँ चलाने वाले – जस्टिस सच्चर
APCR strongly condemns the suspicious custodial killing of Maulana Khalid Mujahid by U.P. police
Arasmetta in Bastar : Yet another ‘encounter’ killing
The Siddharamaiah Circus!!!
खालिद हत्याकाण्ड : दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की माँग ने पकड़ा जोर
| लेखक | विषय | संवाद | साभार | अनुवादक |
पहले वो आए साम्यवादियों के लिए
और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था
फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए
और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था
फिर वो यहूदियों के लिए आए
और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था
फिर वो आए मेरे लिए
और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था
