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हस्तक्षेप

अंधेर नगरी के राजा

पुण्य प्रसून बाजपेयी

पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने माफी मांगी। पहली बार लोकसभा में विपक्ष के किसी नेता ने माफ भी कर दिया। पहली बार भ्रष्टाचार, महंगाई और कालेधन पर सरकार कटघरे में खड़ी दिखी। पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री से लेकर जांच एंजेसियों को समाजवादी सोच का पाठ यह कर पढ़ाया कि अपराध अपराध होता है। उसमें कोई रईस नहीं होता। पहली बार प्रधानमंत्री के चहेते कारपोरेट घरानों को भी अपराधी की तरह सीबीआई हेडक्वाटर में दस्तक देनी पड़ी। पहली बार चंद महीने पहले तक सरकार के लिये देश के विकास से जुडी डीबी रियल्टी कार्पो सरीखी कंपनी के निदेशक जेल में रहकर पद छोड़ना पड़ा। पहली बार पौने सात साल के दौर में यूपीए में संकट भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर मंडराया। और पहली बार सरकार को बचाने भी वही दल खुल कर आ गया जिसकी राजनीति गैर कांग्रेसी समझ से शुरु हुई। यानी पहली बार देश में यह खुल कर उभरा कि मनमोहन सिंह सिर्फ सोनिया गांधी के रहमो करम पर प्रधानमंत्री बनकर नहीं टिके है बल्कि देश का राजनीतिक और सामाजिक मिजाज भी मनमोहन सिंह के अनुकूल है।

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)