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सह-संचारी

बेहतर दुनिया की तलाश

पुण्य प्रसून बाजपेयी

जंतर-मंतर

लेखक मंच

कारवाँ

दखल की दुनिया

पहलू

छम्मकछल्लो कहिस

एक ज़िद्दी धुन

यही वह जगह है

समाजवादी जनपरिषद

कबाड़खाना

शैशव

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रविवार

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अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

कुछ विचार ऐसे भी -----

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उदय प्रकाश

एक हिन्दुस्तानी की डायरी

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लाल बुझक्कड़

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शशिकांत

संहति

सूचना एक्सप्रेस

हफ्तावार

हाशिया

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)