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हस्तक्षेप

निर्मल-आनंद

अनहद

लेखक मंच

अनुवाद

हाशिया

उदय प्रकाश

एक हिन्दुस्तानी की डायरी

कलामे-फ़ैज़

कवियाना

कुछ विचार ऐसे भी -----

ख्वाब का दर

गंगा ढाबा

छाया

जनज्वार

दोस्त

पुनर्विचार

मसिजीवी

राग दरबारी

रिजेक्ट माल

लाल बुझक्कड़

शैशव

संहति

हफ्तावार

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)