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एमी गुडमैन

Amy Goodman

भारत में सामूहिक बलात्कार के आरोपियों के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज, प्रदर्शनकारियों का महिलाओं के लिए व्यापक अधिकारों पर ज़ोर

भारत में पांच पुरुषों के विरुद्ध एक चलती बस में एक 23 वर्षीय छात्रा के अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोप में औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया गया है। 16 दिसंबर के बलात्कार के दौरान इस महिला  का शरीर इतनी बुरी तरह विकृत हो गया था कि उसे आंतों के प्रत्यारोपण की जरूरत थी, लेकिन अंततः गंभीर आंतरिक चोटों के कारण उसका जीवन नहीं बचाया जा सका। "मुझे लगता है कि यह एक लंबे समय से संचित गुस्से और आक्रोश का असर था," भारत में यौन हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की मुख्य आयोजकों में से एक, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की कविता कृष्णन का कहना है। "इस मामलें में यह सब फट पड़ा, शायद इसलिए कि उसके साथ ऐसा इतनी मामूली दैनिक गतिविधि के दौरान हुआ: वह केवल अपने दोस्त के साथ एक फिल्म देखने के बाद घर जाने के लिए एक बस में चढ़ी थी। और मुझे लगता है कि इस बात ने हर एक के मानस को छू लिया क्योंकि हर कोई उसकी जगह अपने को रख कर देख सकता था। मुझे लगता है कि उन सबने इस अनाम व्यक्ति के साथ एक गहरा संबंध महसूस किया।" सामूहिक बलात्कार के इस मामले ने भारत में यौन हिंसा के अन्य मामलों पर प्रकाश डाला है, जहां हर 20 मिनट में एक महिला के साथ बलात्कार किया जाता है, राष्ट्रीय अपराध रजिस्ट्री के अनुसार। "मुझे लगता है हमें उऩ सब बदलावों पर भी नज़र डालनी पड़ेगी जो कि विभिन्न प्रकार की सामाजिक और सांस्कृतिक ताकतों के कारण हो रहे हैं - वैश्वीकरण, लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना, दिखावटी उपभोग, उन सब चीज़ों का मीडिया में व्यापक प्रदर्शन जो इतनी आसानी से उपलब्ध हैं," एलोरा चौधरी, बोस्टन के मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में महिलाओं के अध्ययन की एसोसिएट प्रोफेसर, का मानना है। "ये सब के सब, मुझे लगता है, और खास तौर पर इन सब विभिन्न प्रकार की ताकतों तथा लैंगिक गतिकी के परस्पर संघर्ष के चलते शहरी क्षेत्रों में हो रहे परिवर्तनों  से लैंगिक गतिकी में, स्त्री-पुरुष संबंधों में तरह-तरह के बदलाव आ रहे हैं।" [प्रतिलेख शामिल है]

अतिथि:

कविता कृष्णन, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की सचिव और भारत में यौन हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में से एक।

एलोरा चौधरी, बोस्टन में मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में महिलाओं के अध्ययन की एसोसिएट प्रोफेसर।

ईराकी युद्ध अभिलेख

डैनियल एल्सबर्ग

23 अक्टूबर, 2010

[पाँच बजे शाम ई एस टी, शुक्रवार 22 अक्टूबर 2010 को विकिलीक्स ने इतिहास में गुप्त सैनिक अभिलेखों का सबसे बड़ा संकलन जनता के सामने जारी किया। ये 391,832 रिपोर्टें ('ईराकी युद्ध अभिलेख') ईराक में युद्ध और कब्ज़े का ब्यौरा देती हैं, 1 जनवरी 2004 से 31 दिसंबर 2009 तक (मई 2004 तथा मार्च 2009 के महीनों को छोड़ कर), सीधे संयुक्त राज्य अमरीका के सैनिकों के शब्दों में। इनमें से हर एक 'सिगऐक्ट' यानी युद्ध में उल्लेखनीय कृत्य है। ये घटनाओं का बिल्कुल वही विवरण देते हैं जो अमरीकी सेना ने ईराक में ज़मीनी तौर पर देखा और सुना, और ये युद्ध

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)