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अनीश अंकुर

हम बराबरी और संस्‍कृति का ‘विकास’ चाहते हैं: बिनायक

बिनायक सेन

10  जनवरी, 2011

[मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन को उम्रकैद की सजा सुनाये जाने की घटना ने अपने देश के साथ-साथ दुनिया के लोगों का ध्यान खींचा है। देश के हर हिस्से से विनायक सेन की सजा के खिलाफ आवाज उठ रही है। लगभग हर दिन किसी न किसी हिस्से में प्रतिरोध सभा, प्रतिवाद मार्च आदि का आयोजन किया जा रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस सजा की कड़े शब्‍दों में निंदा की है। छत्तीसगढ़ की स्थानीय अदालत के इस फैसले को लोग लोकतंत्र पर हमले के रूप में देख रहे हैं। ये साक्षात्कार विनायक सेन से कुछ महीनों पहले अनीश अंकुर ने लिया था, जब वे ‘चंद्रशेखर स्मृति व्याख्यान’ के सिलसिले में पटना गये थे। अनीश ने इस साक्षात्‍कार को भेजने के साथ ही ये सूचना दी है कि ये द संडे पोस्‍ट में छपा है : मॉडरेटर - मोहल्ला लाइव]

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)