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संयुक्त राज्य अमरीका

United States of America

दिल लगाई और सताई - 11

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का अंतिम भाग। अनुवादक: लाल्टू]

सेरा की लिखाई में ताकत थी; एंजेलीना के भाषण में आग थी। एक बार बॉस्टन ऑपेरा हाउस में वह लगातार छः रातों तक बोलती रही। कुछ भले दास प्रथा विरोधी साथियों की दलील थी कि लिंगों में समानता की बात नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इससे दास प्रथा विरोधी आंदोलन को नुकसान पहुँचता है। इस दलील के खिलाफ़ उसने कहा -

"दास प्रथा विरोध को हम तब तक पूरी ताकत से आगे नहीं बढ़ा सकते, जब तक रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट को हम दूर नहीं करते। आज अगर हम सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार खो बैठें, तो अगले साल आवेदन करने का अधिकार खोएंगे और उसके अगले साल लिखने का अधिकार खो बैठेंगे और यह सिलसिला चलता रहेगा। जब औरत मर्द के पैरों तले दबी हो और शर्म से चुप हो तो वह गुलामों के लिए क्या कर पाएगी?"

मैसाचुसेट्स राज्य की विधान-परिषद में दास प्रथा विरोधी आवेदनों पर बोलने वाली पहली नारी (1838 में) एंजेलीना थी। बाद में उसने बतलाया, "मैं भावनाओं के आवेग से होश खोने वाली थी ...।" उसके भाषणों में भीड़ बड़ी होती थी और सेलेम नगर के एक प्रतिनिधि ने प्रस्ताव रखा कि "मैसाचुसेट्स की राज्य सभा के संविधान का अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाई जाए जो इस बात की जाँच करे कि हम सुश्री ग्रिम्के का एक और भाषण झेल पाएंगे या नहीं।"

दीगर मामलों पर बात करने से औरतों की स्थिति पर बोलने के रास्ते खुले। बॉस्टन क्षेत्र में जेलों और आश्रमों के अवलोकनों पर मैसाचुसेट्स विधान परिषद्  में डोरोथिआ डिक्स ने 1848 में इस तरह कहा -

"बहुत ही दुःखदायी और शोचनीय परिस्थियों का आँखों देखा हाल मैं सुनाती हूँ ... भद्रजन, इस पूंजीबद्ध राज्य संघ में विक्षिप्त व्यक्तियों को किस तरह पिंजड़ों में, अल्मारियों में, कोठरियों में, छोटे कमरों में, बिलों में, ज़ंजीरों से बांध, नंगे रखा जाता है और छड़ों से पीटा जाता है और चाबुक द्वारा पिटाई कर उनसे आदेश मनवाए जाते हैं, इस पर दो शब्दों में आपका ध्यान दिलाना चाहूंगी।"

दिल लगाई और सताई - 10

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का दसवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

मैसाचुसेट्स राज्य के गार्डनर नगर में, जहाँ उसका भाई धर्मगुरू था, लूसी स्टोन ने नारी अधिकारों पर भाषण देना शुरू किया। वह कद की छोटी, करीब सौ पाउण्ड वज़न (छियालीस किलो) की थी और बहुत अच्छी वक्ता थी। दास-प्रथा विरोधी सोसायटी के लिए भाषण देने पर उस पर कई बार ठंडा पानी फेंका गया, किताबें उछाल कर चोट पहुँचाई गई, लोगों ने हमला किया।

जब हेनरी ब्लैकवेल के साथ उसकी शादी हुई, रस्म के दौरान उन्होंने परस्पर हाथ थामे और एक वक्तव्य पढ़ा -

"हालांकि सार्वजनिक रूप से पति-पत्नी का संबंध मानते हुए, हम परस्पर स्नेह को स्वीकार करते हैं ... यह घोषणा करना हम कर्तव्य मानते हैं कि ऐसा करते हुए हम न तो उन वैवाहिक नियमों को स्वीकार करते हैं, जिनमें पत्नी को स्वच्छंद, तार्किक व्यक्ति नहीं माना गया है, जबकि पति को अस्वाभाविक और क्षतिकर गुरुता दी गई है।"

अपना नाम बदलने से इंकार करने वाली पहली औरतों में एक वह थी। वह 'श्रीमती स्टोन' कहलाती थी। सरकार में अपना प्रतिनिधित्व न होने से जब उसने कर देने से इंकार किया, अधिकारियों ने उसके घर का सामान बदले में ले लिया, यहाँ तक कि बच्चे का झूला भी नहीं छोड़ा।

न्यूयॉर्क राज्य की एक महिला पोस्टमास्टर अमीलिया ब्लूमर ने जब 'ब्लूमर' नामक परिधान का विकास किया, नारी कार्यकर्ता पुराने स्टाइल की तिमि मछली की हड्डियों से बनी बाडीस, कोर्सेट और पेटीकोट छोड़कर ब्लूमर पहनने लगीं। उस ज़माने की नारीवादी आंदोलन की एक मुख्य नेता एलिज़ाबेथ केडी स्टैंटन ने अपनी एक रिश्ते की बहन के ब्लूमर पहनने के बारे में लिखा है :

"जब खुद मैं बिना किसी बोझ लिए लंबे-चौड़े कपड़ों में कठिनाई से ही ऊपर चढ़ पाती थी, अपनी बहन को एक हाथ में रोशनी का लैंप और दूसरे में बच्चा लिए आसानी से सीढ़ियों पर चढ़ते देख मुझे समझ में आ गया कि महिलाओं के परिधान में सुधार की बड़ी ज़रूरत है और मैंने जल्दी ही ऐसे कपड़े पहनने शुरू कर दिए।"

विकीलीक्स का सही इस्तेमाल किया गया तो देश की राजनीति का बहुत भला होगा

शेष नारायण सिंह

[हम बस यहाँ इतना जोड़ना चाहेंगे कि विकीलीक्स के काम के पीछे अकेले जूलियन असांज ही नहीं, और भी बहुत से लोग हैं, सबसे महत्वपूर्ण तो वे जिन्होंने दस्तावेज़ उपलब्ध करवाए। विकीलीक्स से बाहर भी उनके बहुत से समर्थक हैं। एक समय तक तो मुख्यधारा का मीडिया भी उनकी सराहना ही कर रहा था और उनके द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेज़ों का बड़े ज़ोर-शोर से उपयोग कर रहा था। अमरीका का मीडिया भी। फिर विकीलीक्स ने कुछ ऐसा कर डाला कि 'अपनी टीम' और 'अपने लोगों' के विरोध में चला गया। ऐसा लगने लगा कि 'अपन' भी घेरे में आ जाएंगे। ऐसा होते ही 'न्यूयॉर्क टाइम्स' तो क्या 'द गार्जियन' तक का राग बदल गया और जूलियन असांज हीरो से विलन बन गए। लेकिन विकीलीक्स के दस्तावेज़ों का उपयोग अब भी हो रहा है और उनकी जीवनी पर पहले किताब और फिर किताब पर आधारित फिल्म से पैसा कमाने में उन्हीं लोगों को परहेज नहीं है। उधर जूलियन असांज एक तरह से नज़रबंद हैं आने वाले खतरे के इंतज़ार मेंऔर ब्रैडले मैंनिंग के ऊपर मृत्युदंड का खतरा मंडरा रहा है (उन्हें लगातार दी जा रही गैर-कानूनी यातना के अलावा)। शर्ली जैकसन के अंदाज़ में कहें तो अच्छी खेती (मानव) बलि मांग रही है। दूसरे ढंग से कहें तो शहीद बनाने का मौसम है। पर दस्तावेज़ों का इस्तेमाल हो रहा है, यह भी कम नहीं है। उम्मीद तो कर ही सकते हैं कि इससे कुछ अच्छा बदलाव आए। उम्मीद करने के लिए हाल-फिलहाल बहुत ज़्यादा चीज़ें हैं भी नहीं । फिर भी उस सवाल से नज़र बचाना मुश्किल होता जा रहा है जो उधर पीछे अटका हुआ है पर गायब होने का नाम नहीं ले रहा : "है कोई माई का लाल वीर पुरूष जो भ्रष्टाचार का पर्दाफ़ाश करने से आगे जाकर भारत का ब्रैडले मैंनिंग या डैनियल एल्सबर्ग बन सके?"। हम बड़ी कोशिश कर रहे है

दिल लगाई और सताई - 9

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का नवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

नैन्सी कॉट की पुस्तक के शीर्षक 'द बौंड्स ऑफ़ वुमनहुड' (स्त्रीत्व के बंधन) से उन्नीसवीं सदी की शुरूआत में औरतों के हालात पर उनके (औरतों के) दुविधापूर्ण विचारों का पता चलता है। घर में वे 'औरत की दुनिया' के नये सिद्धांत में जकड़ी हुई थीं और जब वे फ़ैक्ट्रियों या यहाँ तक कि मध्यवर्ग के घरों में काम करने गईं, वहाँ एक-दूसरे प्रकार की गुलामी का सामना उन्हें करना पड़ा। दूसरी ओर इन परिस्थितियों से अपने हालात पर उनकी एक आम चेतना उभरी और उनमें आपस में एकता के बंधन मज़बूत हुए।

दिल लगाई और सताई - 8

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का आठवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

मैसाचुसेट्स राज्य के चिकोपी नगर के ऐसे नागरिक की डायरी में, जिसे महिलाओं से सहानुभूति न थी, 2 मई, 1843 की एक घटना का उल्लेख है -

"लड़कियाँ बड़ी तादाद में इकट्ठा हो रही हैं ... आज सुबह नाश्ते के बाद रंगीन खिड़की के पर्दे से बनाए गए एक बैनर के पीछे-पीछे सोलह औरतों का एक जुलूस चौराहे के चारों ओर चलता रहा ... वापस लौट आने तक ... उनकी संख्या चौवालीस थी। कुछ देर मार्च करने के बाद वे तितर-बितर हो गईं। निशाहार के बाद बयालीस की संख्या में मार्च करती हुई वे काबोट नगर तक गईं ... वे सड़कों पर मार्च करती रहीं, इसका उनको कोई फ़ायदा न था।"

अमेरिकी पुलिस का लोकतंत्र

अनिल सिन्हा

अमेरिकी सैनिकों की बर्बरता व क्रूरता से आज पूरी दुनिया परिचित है। ऐसा शायद ही कोई दिन होता हो जब अमेरिकी सैनिक दुनिया के किसी न किसी हिस्से में अपने करतब न दिखा रहे हों। दरअसल उनका प्रशिक्षण ही ऐसा है कि उन्हें ट्रिगर, बैरल, बम राकेट आदि के सामने जो भी दिखाई देता है, चाहे वह आदमी हो या प्रांतर, उसे उड़ा देना है, उसे नेस्तनाबूद कर देना है। यह ट्रेनिंग उन्हें तब से मिलती आ रही है जब कोलम्बस ने अमेरिका की खोज की थी और वहां के मूल निवासियों को नेस्तनाबूद करते हुए ब्रितानी, मेक्सिकन आदि साम्राज्यवादियों के लिए यहां का रास्ता खोल दिया था। हॉवर्ड जिन जैसे अमेरिकी लेखक ने इस स्थिति को बड़े प्रमाणिक और तथ्यपूर्ण ढंग से अपनी किताब ‘पीपुल्स हिस्ट्री आफ अमेरिका’ में लिखा है। सैनिकों की बात छोड़ दें तो अमेरिकी पुलिस और जितनी तरह के सुरक्षाकर्मी हैं, जैसे- इमिग्रेशन आफिसर, रेल पुलिस, सिविल पुलिस आदि कानून लागू करने के नाम पर हिंसा और बर्बरता की हद पार करते हुए दिखाई देते हैं। फोमांट (कैलीफोर्निया, अमेरिका) से लौटते हुए मुझे कुछ महीने बीत गए हैं, पर वहां की पुलिस की बर्बरता मेरी आंखों के सामने बार बार नाच उठती है। किस हद तक जातीय द्वेष-

दिल लगाई और सताई - 7

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का सातवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

न्यूयॉर्क में सन् 1808 में इस तरह का एक धर्मादेश पढ़ा गया -

"नारियों को पत्नियों के रूप में कितनी रोचक और महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गईं हैं ... पति की सलाहकार के और मित्र; जो उसकी चिंताओं को कम करना, उसके दुखों को मरहम लगाना, उसकी खुशियाँ बढ़ाना अपना दैनिक काम मानती है; जो एक अभिभावक फ़रिश्ते-सी उसके स्वार्थों की रक्षा करती है, खतरों से उसे सावधान करती है, परेशानियों से उसे बचाती है और अपने पवित्र, मेहनती और आकर्षक स्वभाव से लगातार उसे अधिक धार्मिक, उपयोगी, सम्मानयोग्य और खुश बनाती है।"

दिल लगाई और सताई - 6

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का छठा भाग। अनुवादक: लाल्टू]

अलग-अलग दिशाओं में जटिल परिवर्तन हो रहे थे। अब औरतें घर से निकलकर  औद्योगिक माहौल में शामिल होने को मज़बूर थीं। साथ ही उन पर नियंत्रण कायम रखने के लिए उन पर घर में रहने को भी दबाव डाला जा रहा था। घर की ठोस दीवारों के अंदर घुसती हुई बाहरी दुनिया पुरुष के आधिपत्य की दुनिया में डर और तनाव पैदा कर रही थी। इसके टूटते पारिवारिक बंधनों की जगह अब सैद्धांतिक नियंत्रण ले रहे थे। पुरुषों द्वारा लाए गए 'औरत की जगह' के सिद्धांत को कई औरतों ने स्वीकार किया।

दिल लगाई और सताई - 5

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का पाँचवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

कई महिला इतिहासकारों ने हाल में यह लिखा है कि अमरीकी इंकलाब में श्रमिक वर्गों से आई औरतों के अवदान को नज़र-अंदाज़ किया गया है। ऐसा नेताओं की संभ्रांत पत्नियों (डॉली मैडिसन, मार्था वॉशिंगटन, ऐबिगेल ऐडम्स) (क्रमशः जेम्स मैडिसन, जॉर्ज वॉशिंगटन और सैमुएल ऐडमंड्स की पत्नियाँ - इन तीनों पुरुष नेताओं का अमरीकी आज़ादी के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।) के साथ नहीं हुआ। 'डर्टी कैट' के नाम से प्रसिद्ध मार्गरेट कोर्बिन, डेबोरा सैंप्सन गार्नट और 'मॉली पिचर' ज़मीन से जुड़ी निम्नवर्गीय औरतें थीं, हालांकि इतिहासकारों ने इन्हें संभ्रांत महिलाओं जैसी सुकोमल जताने की कोशिश की है। लड़ाई के अंतिम वर्षों में जिन गरीब औरतों ने शिविरों में जाकर मदद की और लड़ाई में हिस्सा लिया, उन्हें वेश्याएँ कहा गया, जबकि वैली फ़ोर्ज में अपने पति से मिलने जाती मार्था वॉशिंगटन को इतिहास में विशेष जगह मिली।

दिल लगाई और सताई - 4

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का चौथा भाग। अनुवादक: लाल्टू]

अट्ठारहवीं सदी में लंदन की एक लोकप्रिय 'पॉकेट बुक' अमरीकी उपनिवेशों में भारी तादाद में पढ़ी गई। इसका शीर्षक था 'एक पुत्री को सलाह'।

"पहले नींव डालना ज़रूरी है। भिन्न लिंगों में असमानता होने से और दुनिया को अधिक संपन्न बनाने के लिए कानून बनाने वाले पुरुषों को तर्क-शक्ति अधिक मिली, इससे औरतों को अपने लिए तय किए गए कर्तव्यों को पालन करने की आवश्यक तैयारी का बेहतर मौका मिला ,,, तुम्हारी लिंग जाति को अपने आचरण के लिए हमारी तार्किकता की ज़रुरत थी, अपनी रक्षा के लिए हमारी ताकत की और हमें तुम्हारी कोमलता की और तुमसे मनोरंजन की ..."

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)