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दिल लगाई और सताई - 9

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का नवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

नैन्सी कॉट की पुस्तक के शीर्षक 'द बौंड्स ऑफ़ वुमनहुड' (स्त्रीत्व के बंधन) से उन्नीसवीं सदी की शुरूआत में औरतों के हालात पर उनके (औरतों के) दुविधापूर्ण विचारों का पता चलता है। घर में वे 'औरत की दुनिया' के नये सिद्धांत में जकड़ी हुई थीं और जब वे फ़ैक्ट्रियों या यहाँ तक कि मध्यवर्ग के घरों में काम करने गईं, वहाँ एक-दूसरे प्रकार की गुलामी का सामना उन्हें करना पड़ा। दूसरी ओर इन परिस्थितियों से अपने हालात पर उनकी एक आम चेतना उभरी और उनमें आपस में एकता के बंधन मज़बूत हुए।

उच्चशिक्षा से प्रतिबंधित मध्यवर्ग की औरतों ने प्राथमिक शिक्षण में सर्वाधिकार स्थापित कर लिया। शिक्षक होते हुए वे अधिक पढ़ने लगीं, ख्यालात का अधिक प्रसार करने लगीं और शिक्षा अपने-आप पुराने विचारों की विरोधी हो गई। उन्होंने पत्रिकाओं और अखबारों के लिए लिखना शुरू किया और कुछ महिलाओं ने प्रकाशन भी शुरू किए। 1780 और 1840 के बीच नारी साक्षरता दुगुनी हो गई। औरतों ने स्वास्थ्य-सुधार का काम भी किया। उन्होंने यौन संबंधों में पाखंड और वेश्याओं के शोषण के खिलाफ़ आंदोलन शुरू किए। धार्मिक संस्थाओं से भी वे जुड़ीं। उनमें से सबसे प्रभावी कुछ महिलाएँ दासप्रथा-विरोधी आंदोलन से भी जुड़ीं। इसलिए जब 1840 के बाद एक स्पष्ट नारीवादी आंदोलन उभरा, संगठन, विक्षोभ प्रदर्शन और भाषण देने में वे सिद्धहस्त हो चुकीं थीं।

1819 में न्यूयॉर्क राज्य की विधानसभा में जब एमा विलर्ड ने नारी-शिक्षा पर कहा, वह एक साल पहले टॉमस जेफ़र्सन द्वारा (एक खत में) दिए गए एक वक्तव्य का खंडन कर रही थी, जिसमें उसने (जेफ़र्सन ने) यह कहा कि औरतों को कुछ अपवादों को छोड़ 'कूड़े के ढेर जैसे' उपन्यास नहीं पढ़ने चाहिए, "इसी तरह, बहुत सारी कविताएँ भी नहीं पढ़नी चाहिए।" "नारी-शिक्षा को," उसने कहा था, "जीवन के आभूषण और प्रहसन ... यानी औरत के लिए नृत्य, चित्रकला और संगीत ..." पर केन्द्रित होना चाहिए।

एमी विलर्ड ने विधानसभा को बतलाया कि नारी शिक्षा को "उन्हें जवानी के आकर्षण और सौंदर्य-प्रदर्शन में कुशल बनाने के लिए ही" सँवारा गया है। "समस्या यह है," उसने कहा कि "जो भी पुरुषों की रुचि है, उसे नारी-चरित्र के निर्माण में मानक के रूप में लिया गया है। तर्क और धर्म हमें यह सिखाते हैं," उसने कहा, "कि हमारा भी प्राथमिक अस्तित्व है ... हम महज पुरुषों के पिछलग्गू नहीं हैं।"

1821 में विलर्ड ने ट्राय (न्यूयॉर्क राज्य का एक शहर) नारी शिक्षालय खोला, जो नारी-शिक्षा की पहली मान्यताप्राप्त संस्था बनी। उसने बाद में लिखा कि मानव-शरीर के बारें में पढ़ा कर किस तरह उसने लोगों को विक्षुब्ध किया :

"तीस के दशक की शुरूआत में सेमिनरी में आईं माएँ किसी छात्रा को ब्लैकबोर्ड पर दिल, शिराएँ और नसों की तस्वीरें बनाकर रक्त-संचालन की व्याख्या करते देख ऐसे चौंकती थीं कि वे शर्म से कमरा छोड़ निकल जाती थीं। लड़कियों की शालीनता बनाए रखने को और अत्यधिक उत्तेजना से उन्हें बचाने के लिए पाठ्य-पुस्तकों में मानव-शरीर को दर्शाते पन्नों पर मोटे कागज़ चिपकाए गए थे"

सिर्फ़ पुरुषों द्वारा संचालित प्रोफ़ेशनल शिक्षा संस्थानों में घुसने के लिए औरतों ने संघर्ष किया। 1835 में प्रैक्टिस चालू करने वाली एक महिला डॉक्टर हैरिअट हंट को दो बार हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज में भर्ती नहीं किया गया। पर उसने मुख्यतः औरतों और बच्चों पर अपनी प्रैक्टिस चालू रखी, उसे खाद्य-नियंत्रण, व्यायाम, सफ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा विश्वास था। 1843 में उसने एक महिला शरीर-विज्ञान सोसायटी चलाई, जहाँ हर महीने उसने भाषण दिए। परंपरा की अवमानना करते हुए उसने शादी नहीं की।

एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल को मेडिकल डिग्री 1849 में मिली। इसके पहले जेनेवा कॉलेज में भर्ती होने के लिए उसे कई प्रयास करने पड़े। फिर उसने गरीब औरतों और बच्चों के लिए न्यूयॉर्क डिस्पेंसरी खोली, ताकि "गरीब औरतों को अपनी जाति (लिंग) के ही किसी डॉक्टर से परामर्श करने की सुविधा मिले।" अपनी पहली वार्षिक रिपोर्ट में उसने लिखा -

"मेरा ऐसा पहला केस, जिसमें किसी और चिकित्सक की सलाह ज़रूरी हो, बड़ा अनोखा था। एक बुजुर्ग महिला को भारी न्यूमोनिया हुआ था। एक प्रसिद्ध नर्म दिल चिकित्सक की सलाह लेने हम गए ... वह महाशय रोगी को देखकर मेरे साथ आँगन में आए। वहाँ उत्तेजित होकर कमरे में टहलते हुए उन्होंने कहा, "असाधारण केस ! ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ, मैं सचमुच नहीं सोच सक पा रहा कि क्या करूँ !" मैं आश्चर्य से सुनती रही, क्योंकि स्पष्ट था कि रोगी न्यूमोनिया से ग्रस्त थी और कोई खास खतरा नहीं था। आखिरकार मुझे समझ आया कि उनकी शंका रोगी के बारे में नहीं, मेरे बारे में और एक महिला चिकित्सक के साथ सलाह करने के बारे में थी !"

महिलाओं की भर्ती में सबसे बड़ी पहल ओवरलिन कॉलेज ने की। पर धर्मशास्त्र में शिक्षा पूरी होने पर इस विभाग की पहली छात्रा ऐंटोनेएट ब्राउन ने देखा कि उसका नाम हटा दिया गया था। लूसी स्टोन ने ओवरलिन कॉलेज में जबर्दस्त विरोध किया। वह शांति-संगठन और दास-प्रथा विरोधी कार्यों में सक्रिय थी, अश्वेत ['कलर्ड' शब्द का अनुवाद यहाँ 'अश्वेत' किया गया है - यह 'ब्लैक' शब्द के लिए उचित नहीं है - अनु.] विद्यार्थियों को पढ़ाती थी और लड़कियों के लिए वाद-विवाद क्लब संचालित करती थी। दीक्षांत समारोह का भाषण लिखने को उसे कहा गया, पर फिर बताया गया कि वह एक पुरुष द्वारा पढ़ा जाएगा। उसने लिखने से मना कर दिया।

 

दिल लगाई और सताई - 8

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दिल लगाई और सताई - 3

दिल लगाई और सताई - 2

दिल लगाई और सताई - 1


 


लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)