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दिल लगाई और सताई - 7

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का सातवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

न्यूयॉर्क में सन् 1808 में इस तरह का एक धर्मादेश पढ़ा गया -

"नारियों को पत्नियों के रूप में कितनी रोचक और महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गईं हैं ... पति की सलाहकार के और मित्र; जो उसकी चिंताओं को कम करना, उसके दुखों को मरहम लगाना, उसकी खुशियाँ बढ़ाना अपना दैनिक काम मानती है; जो एक अभिभावक फ़रिश्ते-सी उसके स्वार्थों की रक्षा करती है, खतरों से उसे सावधान करती है, परेशानियों से उसे बचाती है और अपने पवित्र, मेहनती और आकर्षक स्वभाव से लगातार उसे अधिक धार्मिक, उपयोगी, सम्मानयोग्य और खुश बनाती है।"

चूंकि बच्चों को पढ़ाना उनका काम था, औरतों को देशभक्त होने को भी कहा गया। औरतों की एक पत्रिका ने 'एक अमरीकी औरत किस तरह अपनी देशभक्ति को सबसे अच्छी तरह दर्शा सकती है,' विषय पर सर्वोत्तम निबंध रचना पर पुरस्कार घोषित किया।

नैंसी कॉट के अनुसार 'द बौंड्स ऑफ़ वुमनहुड' (औरत होने के बंधन) पुस्तक में 1820 और 30 के दशकों में बहुत सारे उपन्यास, कविताएँ, निबंध, धर्मादेश और इसी तरह परिवार, बच्चों तथा औरतों की भूमिका पर दस्तावेज़ छपे। बाहरी दुनिया अधिकाधिक जटिल, व्यावसायिक और कठिन होती जा रही थी। घर (परिवार) एक प्रकार से, मौजूदा हालात से बचाव की एक नई काल्पनिक अतीत की आकांक्षा को मूर्त करता था।

शायद घर को आश्रय मानते हुए, नई अर्थव्यस्था को एक ज़रूरी सच मानने से इसे स्वीकार करना अपेक्षाकृत आसान हो रहा था। सन् 1819 में एक सच्चरित्र पत्नी ने लिखा, "... दुनिया की हवा ज़हरीली है। अपने साथ एक विषनाशक ज़रूर रखिए, अन्यथा रोग घातक होगा।" कॉट ने लिखा है कि "ये सब लेख व्यापार, उद्योग, स्पर्धा, पूंजी की दुनिया को चुनौती देने के लिए नहीं थे, बल्कि उसे और अधिक स्वीकार्य बनाने के लिए थे।"

पारिवारिकता का प्रपंच औरत को 'अलग पर समान' के सिद्धांत से दबा रखने एक तरीका था। पुरुष जैसा ही महत्वपूर्ण पर अलग किस्म का काम उसे दिया गया। इस समानता में यह सच था कि औरत को अपना साथी चुनने की स्वच्छंदता न थी, और एक बार विवाह हो जाने पर, उसका जीवन हमेशा के लिए तय था। सन् 1791 में एक लड़की ने लिखा, "मेरे जीवन के सुखी या दुखी होने का पासा चलने ही वाला है ..."

विवाह अपने साथ शृंखलाएँ लाता था और बच्चों से शृंखलाएँ मज़बूत होती थीं। सन् 1813 में एक औरत ने लिखा, "जल्दी ही होने वाले तीसरे बच्चे और उसके बाद के ज़रूरी काम के ख्याल से मुझे इतनी तकलीफ़ होती है कि मुझे डूबते रहने का अहसास होता है।" इस अत्याचार को यह कहकर हल्का किया जाता थी कि औरत को कितना महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है - बच्चों को आत्म-नियंत्रण और वैयक्तिक, न कि सामूहिक, प्रयासों से प्रगति के नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना।

नई सोच को सफलता मिली; बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक स्थायित्व इससे मिला। पर इसके अस्तित्व से दूसरी धाराओं को भी बल मिला, जो आसानी से रुकने वाली न थीं। औरत को अपनी एक दुनिया मिलने से एक अलग किस्म की ज़िंदगी की तैयारी के लिए उस जगह, उस समय के उपयोग की संभावना बढ़ी।

स्पष्ट रूप से दिखती औरत की अधीन सत्ता के प्रमाणों को 'सही नारी-चरित्र का प्रपंच' मिटा न सका। उसे मतदान का अधिकार न था। वह संपत्ति की मालिक नहीं हो सकती थी। अगर वह काम करती तो एक ही काम में लगे मर्दों की तुलना में उसकी तनख्वाह एक चौथाई थी। कानून व चिकित्सा के पेशों में, कॉलेज में, धर्माधिकारी पदों में उन्हें जगह नहीं दी गई।

नैन्सी कॉट ने संकेत किया है, सभी औरतों को पारिवारिक दुनिया को बेहतर बनाने का काम देकर एक ही श्रेणी में डालने से लिंग-भेद का नया वर्गीकरण हुआ, जिससे वर्ग-विभाजन में अस्पष्टता फैली। पर वर्ग का सवाल उठाने के लिए कई ताकतें काम कर रही थीं। सैमुएल स्लेटर ने 1789 में न्यू इंग्लैंड के इलाकों में औद्योगिक कताई के यंत्र लगाए थे - जिससे फैक्ट्रियों में कताई के यंत्र चलाने के लिए युवा - सचमुच 'अनब्याही' - औरतों की ज़रूरत पड़ी। सन् 1814 में मैसाचुसेट्स प्रांत के वाल्थाम नगर में बिजली के करघे लगे और रुई के धागे से कपड़े बनाने के सभी चरणों को एक ही छत के नीचे कर पाना संभव हुआ। नई कपड़ा मिलों की संख्या तेज़ी से बढ़ी। कर्मचारियों में 80 से 90 प्रतिशत औरतें थीं, जिनमें अधिकांश पंद्रह से तीस की उम्र की थीं।

1830 के दशक में इन कपड़ा मिलों में सबसे पहली औद्योगिक हड़तालें हुईं। एलिनोर फ़्लेक्सनर ने 'अ सेंचुरी ऑफ़ स्ट्रगल' (एक सदी से संघर्ष) आँकड़ों से साथ इसकी व्याख्या की है, "1836 में औरतों की औसत दिहाड़ी 37,5 सेंट (100 सेंट = 1 डॉलर) से कम थी और उनमें से हज़ारों को प्रतिदिन सिर्फ 25 सेंट मिलते थे, जबकि दिन में बारह घंटे उनको काम करना पड़ता था।" 1824 में रोड आइलैंड राज्य के पाटुकेट नगर में महिला फैक्ट्री कर्मचारियों की पहली हड़ताल हुई। 202 औरतों मे मज़दूरी में कटौती और लंबे कार्यकाल के खिलाफ़ मिलकर विरोध किया। हालांकि वे अलग-अलग रूप से इकट्ठी हुईं। चार साल बाद न्यू हैंपशायर राज्य के डोवर नगर में औरतों ने स्वतंत्र रूप से हड़ताल की। 1834 में मैसाचुसेट्स राज्य के लोवेल नगर में एक युवती को काम से निकाले जाने के विरोध में दूसरी लड़कियों ने करघे छोड़े। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार उनमें से एक लड़की शहर के जल-पंप पर चढ़ गई और 'नारी अधिकारों तथा धनी-अभिजातों के असमानता के व्यवहार' संबंधी मेरी वोल्स्टोनक्राफ़्ट के ज्वालामयी भाषण पढ़े। इसका सुनने वालों पर बड़ा प्रभाव पड़ा और उन्होंने जान का खतरा उठा कर भी अपने अधिकार लेने की ठानी।

 

दिल लगाई और सताई - 6

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दिल लगाई और सताई - 3

दिल लगाई और सताई - 2

दिल लगाई और सताई - 1


 


लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)