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दिल लगाई और सताई - 5

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का पाँचवाँ भाग। अनुवादक: लाल्टू]

कई महिला इतिहासकारों ने हाल में यह लिखा है कि अमरीकी इंकलाब में श्रमिक वर्गों से आई औरतों के अवदान को नज़र-अंदाज़ किया गया है। ऐसा नेताओं की संभ्रांत पत्नियों (डॉली मैडिसन, मार्था वॉशिंगटन, ऐबिगेल ऐडम्स) (क्रमशः जेम्स मैडिसन, जॉर्ज वॉशिंगटन और सैमुएल ऐडमंड्स की पत्नियाँ - इन तीनों पुरुष नेताओं का अमरीकी आज़ादी के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।) के साथ नहीं हुआ। 'डर्टी कैट' के नाम से प्रसिद्ध मार्गरेट कोर्बिन, डेबोरा सैंप्सन गार्नट और 'मॉली पिचर' ज़मीन से जुड़ी निम्नवर्गीय औरतें थीं, हालांकि इतिहासकारों ने इन्हें संभ्रांत महिलाओं जैसी सुकोमल जताने की कोशिश की है। लड़ाई के अंतिम वर्षों में जिन गरीब औरतों ने शिविरों में जाकर मदद की और लड़ाई में हिस्सा लिया, उन्हें वेश्याएँ कहा गया, जबकि वैली फ़ोर्ज में अपने पति से मिलने जाती मार्था वॉशिंगटन को इतिहास में विशेष जगह मिली।

जब भी नारीवाद भावनाओं को दर्ज किया गया, वे हमेशा सुविधासंपन्न महिलाओं के लेख होते हैं जिनको कि अपनी बातें खुले रूप में कहने की छूट मिली और अपना लिखा दर्ज कराने की सुविधाएँ मिली। आज़ादी की घोषणा के पहले ही मार्च 1776 में ऐबिगेल ऐडम्स ने अपने पति को लिखा -

"... जो नये कानून तुम लोगों को बनाने होंगे, मेरी इच्छा है कि उनको लिखते वक़्त तुम महिलाओं को न भूलोगे। आशा है उनके प्रति अपने पूर्वजों की अपेक्षा तुम लोग अधिक सहानुभूतिशील होगे। पतियों के हाथ असीमित अधिकार न रखना, याद रखना कि संभव हो तो सभी पुरुष तानाशाह बनेंगे। अगर महिलाओं की ओर विशेष ध्यान दिया जाए, तो हम लोग विद्रोह शुरू करेंगी। जिन कानूनों में हमारा कोई प्रतिनिधित्व न हो, उन्हें हम नहीं मानेंगी।"

बहरहाल, जेफ़र्सन (टॉमस जेफ़रसन - अमरीकी संविधान रचयिता) ने अपने वाक्य, "सभी मानवों को समान बनाया गया है" की यह करते हुए अवहेलना की कि अमरीकी औरतें "राजनीति के पचड़े से ज़्यादा समझदार हैं।" आज़ादी के बाद न्यू जर्सी के अलावा किसी प्रांत ने औरतों को मतदान का अधिकार न दिया और न्यू जर्सी में भी यह अधिकार 1807 में वापस ले लिया गया। न्यूयॉर्क प्रांत से संविधान में औरतों को मतदान के अधिकार से वंचित रखने के लिए खास तौर पर 'पुरुष' शब्द उपयोग किया गया।

जबकि सन् 1750 तक गोरों में शायद 90 प्रतिशत पुरुष साक्षर थे, महिलाओं में यह संख्या मात्र 40 प्रतिशत ही थी। श्रमजीवी औरतों के लिए कोई संचार माध्यम न थे। उत्पीड़न के विरुद्ध अपनी भावनाओं को दर्ज कराने के कोई माध्यम उनके पास न थे। न केवल बड़ी मुश्किलों से जीते हुए बड़ी संख्या में उनके बच्चे पैदा हो रहे थे, उन्हें घर के काम भी करने पड़ रहे थे, आज़ादी की घोषणा के दौरान, फ़िलाडेल्फिया में चार हज़ार औरतें और बच्चे स्थानीय मिलों के लिए 'उत्पादन-बढ़त' योजना के अंतर्गत घर में सूत काता करते थे। औरतें दुकानदारी, सराय चलाना और अन्य कई व्यवसायों से भी जुड़ीं थीं। वे बेकरी, टिन का काम, शराब बनाना, चमड़े का काम, रस्सियाँ बनाना, पेड़ों को काटना, छपाई, मुर्दों पर मल्हम लगाना, लकड़ी का काम और जनाने कपड़े बनाना और अन्य कई काम करती थीं।

आज़ादी की लड़ाई के दौरान और बाद औरतों के समानता के अधिकार की चर्चा आम थी। टॉमल पेन ने नारियों के समान अधिकार के लिए कहा। इंकलाबी लड़ाई के तुरंत बाद इंग्लैंड में छपी मेरी वोल्स्टनक्राफ़्ट की अपनी तरह की पहली पुस्तक 'नारी अधिकारों के पक्ष में' (अ विंडीकेशन ऑफ़ द राइट्स ऑफ़ वीमेन) अमरीका में छपी। वोल्स्टनक्राफ़्ट ने यह पुस्तक फ़्रांसीसी इंकलाब के विरोधी रुढ़िवादी अंग्रेज़ एडमंड बर्क के 'फ़्रांसीसी इंकलाब पर चिंतन' में लिखे "औरत एक जानवर है और वह भी उच्चतम दर्जे की जानवर नहीं" के जवाब में लिखी थी। उसने लिखा था -

"मैं औरतों से कहना चाहती हूँ कि वे मन और तन दोनों से ताकतवर बनें और मैं उन्हें जताना चाहती हूँ कि नाज़ुक बातें, नर्म दिल होना, भावुकता और शौकीन स्वभाव कमज़ोरी के पर्याय हैं और इस तरह के स्नेह या दया के पात्र ... जल्दी ही घृणा के पात्र बन जाते हैं ..."

"मैं यह दिखलाना चाहती हूँ कि लिंग (जाति) चाहे कोई भी हो, प्रशंसनीय आकांक्षा का पहला तत्व है एक इंसान के रूप में खड़े हो पाना ..."

अमरीकी आज़ादी की लड़ाई और गृहयुद्ध (सन् 1862-64 का गृहयुद्ध) की अवधि के बीच अमरीकी समाज में बहुत सारे परिवर्तन आ रहे थे - जनसंख्या वृद्धि, पश्चिम की ओर लोगों का बसते जाना, फ़ैक्ट्री-पद्धति का विकास, गोरे मर्दों के राजनैतिक अधिकारों में बढ़ोतरी, नई आर्थिक ज़रूरतों के समांतर समुचित शिक्षा - इनके परिणामस्वरूप नारी की स्थिति में भी परिवर्तन स्वाभाविक था। औद्योगीकरण के पहले, सरहद पर बसे समाज की औरतों के लिए व्यावहारिक ज़रूरतों से कुछ हद तक समता आई थी; औरतें महत्वपूर्ण कामों में लगाई गईं - अखबार निकालना, चमड़े के शोधन-कारखानों का प्रबंधन, सराय चलाना और कुशल कार्यों में भागीदारी आदि। दाई जैसे कुछ पेशों में उनका सर्वाधिकार था। नैन्सी कॉट ने मेहन राज्य में सन् 1795 में एक फ़ॉर्म में रहने वाली मार्था मूर बैलर्ड नाम की एक नैनी के बारे में ज़िक्र किया है, जो "रोटियाँ सेकती थी, शराब बनाती थी, अचार बनाती थी" और जिसने कि पच्चीस वर्षों में दाई के पेशे में हज़ार से अधिक बच्चों के जनने में मदद की, चूंकि शिक्षा परिवार में ही दी जाती थी, औरतों की इसमें भी विशेष भूमिका थी।

 

दिल लगाई और सताई - 4

दिल लगाई और सताई - 3

दिल लगाई और सताई - 2

दिल लगाई और सताई - 1


 


लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)