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दिल लगाई और सताई - 1

हावर्ड ज़िन

[हावर्ड ज़िन रचित 'ए पीपुल्स हिस्टरी ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' (संयुक्त राज्य का जनवादी इतिहास) के छठे अध्याय 'द इंटिमेटली आप्रेस्ड' के अनुवाद का पहला भाग। अनुवादक: लाल्टू]

इतिहास की आम पुस्तकों को पढ़कर देश की आधी जनता को भूल जाना संभव है। खोज करने वाले पुरुष थे, ज़मींदार और व्यापारी पुरुष थे, राजनैतिक नेता पुरुष थे, सेना भी पुरुषों की थी। औरतों का इस तरह अदृश्य होना, उनको नज़रअंदाज़ किया जाना, उनकी अवहेलित सत्ता की ओर संकेत करता है।

इस तरह अदृश्य होने में वे काले गुलामों के समान थीं (और दास औरतें दुहरे उत्पीड़न का शिकार थीं)। नीग्रो लोगों के चमड़े के रंग और शक्ल की खासियत की तरह ही औरतों की जैविक विशिष्टता उनकी निकृष्टता माने जाने का आधार थी। यह सच है कि व्यावहारिक स्तर पर चमड़े के रंग की अपेक्षा एक अधिक महत्वपूर्ण बात औरतों की जैविकता में थी - बच्चों को पैदा करने की उनकी मजबूरी। पर समाज में उन सबको, उनको भी जो निःसंतान थीं, या जिनकी उम्र इसके लिए बहुत कम या ज़्यादा थी, पीछे धकेलने के लिए यह वजह काफी न थी। ऐसा लगता है कि उनकी शारीरिक विशिष्टताओं का फायदा उठाया पुरुषों ने, जो एक ही साथ किसी की नौकर, रति-सहभागी, साथी और बच्चों की जानकी-शिक्षिका-पालिका के रूप में उपयोग, शोषण और उपयोग करना चाहते थे।

औरतों को इस खास दर्जे में आबद्ध करने का सबसे अधिक उपयोग निजी संपत्ति और स्पर्धा पर आधारित समाजों ने किया, जहाँ एक पति, एक पत्नी पर आधारित परिवार काम करे और सामाजिकता की व्यावहारिक इकाइयाँ बनें। संबंधों की घनिष्ठता और निपीड़न में औरतों का यह खास दर्जा एक गृहदास की तरह था। साथ ही ऐसी घनिष्ठता और बच्चों के साथ लंबे समय तक संपर्क से एक प्रकार की दया की ज़रूरत भी उभरी, जो कि कभी-कभार, खासकर दृढ़ता से विरोध होने पर समानता के व्यवहार में भी बदल जाती थी। ऐसी निजी किस्म के निपीड़न को जड़ से उखाड़ना बहुत कठिन ही होना था।

'सभ्यता' और निजी संपत्ति की अवधारणाएँ लाने वाले गोरों के समाज ने अमेरिका और अन्य महाद्वीपों में संपत्ति की साझेदारी और चाचा-चाची, मामा-मामी, नाना-नानी, दादा-दादी वाले वृहत्तर और जटिल सरंचना के परिवारों वाले जिन पूर्ववर्ती समाजों को उखाड़ा, उनमें औरतों को अपेक्षाकृत अधिक बराबर का दर्जा दिया था।

उदाहरणतः दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों के जून्यी कबीलों के वृहत्तर परिवार (बड़े गिरोह) नारी-आधारित होते थे : पति पत्नी के परिवार रहने आता था। यह माना जाता था कि घरों की मालिक औरतें थीं, खेतों के मालिक गिरोह और उत्पन्न सामग्री पर औरतों का समान अधिकार था। अपने परिवार के साथ रह कर औरत अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित थी। अपनी इच्छा से वह पुरुष को तलाक दे सकती थी और उनकी संपत्ति पर अधिकार उसका होता था।

मध्य-पश्चिमी क्षेत्रों के मैदानी इंडियन कबीलों की औरतों पर खेती-बाड़ी की ज़िम्मेदारी नहीं थी, पर कबीले में झाड़-फूंक, हकीमी या संतानियों के रूप में उनका महत्वपूर्ण स्थान था। गिरोहों के पुरुष मुखिया की मौत होने पर औरतें मुखिया का भार संभालतीं, औरतें छोटे तीर चलाना सीखती थीं और अपने साथ छुरियाँ रखती थीं, क्योंकि सू-इंडियनों में आक्रांत होने पर औरत को आत्मरक्षा करने में समर्थ माना जाता था।

सू समाज में लड़की के जवान होने पर ऐसा होता था (प्यूबर्टी समारोह), जिससे किशोरी का आत्म-सम्मान बढ़ता था -

"सही रास्ते चलो मेरी बेटी, तो बादलों की छाया जैसे काले और विशाल भैंसों के झुंड* घास के मैदानों पर दौड़ते तुम्हारे पीछे चलेंगे ... कर्तव्यपरायण बनो, दूसरों का सम्मान करो, कोमल और नम्र बनो, मेरी बेटी। और गर्व से चलो। अगर औरतें अपना सम्मान और पवित्रता खो बैठें, तो बसंत भले ही आए, भैंसों के झुंड घास में बदल जाएंगे। पृथ्वी के गर्म, मज़बूत दिल के साथ रहो और मज़बूत बनो। जब तक किसी जाति की औरतें कमज़ोर न पड़ जाएँ और अपमानित न हों, वह जाति परास्ती नहीं हो सकती ...।"

* भैंसे मैदानी इलाकों से अमरीकी इंडियन समाजों के साथ ओत-प्रोत रूप से जुड़े थे, भोजन, वस्त्र, अस्त्र एवं पूजा-अर्चना, अनेकों प्रक्रियाओं में उनका उपयोग होता था। (अनुवादक)


 


लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)