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वरवर राव

Varavara Rao

अरुंधती ने सिर्फ इतना ही नहीं कहा था

वरवर राव

28 अक्टूबर 2010

कश्मीर की आज़ादी के पक्ष में बोलने को देशद्रोह कहने वाले अरुंधति राय की गिरफ़्तारी की मांग कर रहे हैं. लेकिन, जैसा अरुंधति ने खुद कहा है, वे यह आवाज़ बुलंद करनेवाली अकेली नहीं हैं. कश्मीर ही नहीं, लाखों आवाजें भारत और भारत से बाहर भी उठ रही हैं जो यह मांग कर रही हैं की कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान किया जाये. उन्हें आज़ादी दी जाये. लाखों लोगों को बर्बर फौजी ताकत के बल पर आधी सदी से भी ज्यादा समय तक आपने कब्ज़े में रखना देशप्रेम कैसे हो सकता है?

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)