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प्रसन्न कुमार चौधरी

Prasanna Kumar Chaudhary

राष्ट्रवाद और हिंदी समुदाय - 3

प्रसन्न कुमार चौधरी

हिंदी समुदाय, नवजागरण और राष्ट्रवाद के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान खींचनेवाले इस लंबे लेख की तीसरी  और आखिरी किस्त पोस्ट करते हुए हाशिया अभी राष्ट्रीय और औपनिवेशिक संस्कृति पर जारी बहस में भी शामिल हो रहा है. आगे हम इस बहस से जुड़ी कुछ और सामग्री भी पोस्ट करेंगे और इसी के साथ अपना नजरिया भी पेश करेंगे. फिलहाल यह लेख, हंस से साभार.

राष्ट्रवाद और हिंदी समुदाय - 2

प्रसन्न कुमार चौधरी

हाशिया पर राष्ट्र, आधुनिकता, समुदाय और इतिहास पर प्रसन्न कुमार चौधरी के लम्बे लेख कि पहली किस्त पोस्ट की गयी थी. अब इसकी दूसरी किस्त पेश कि जा रही है. तीन किस्तों में इस लेख का प्रकाशन हंस में हुआ है, जिसे हम भाई रणेंद्र के सौजन्य से यहाँ साभार पेश कर रहे हैं. 
 

राष्ट्रवाद और हिंदी समुदाय - 1

प्रसन्न कुमार चौधरी

राष्ट्र, आधुनिकता, समुदाय और इतिहास लंबे समय से विवादग्रस्त विषय रहे हैं. प्रस्तुत लेख हिंदी समुदाय और उससे संबंधित इतिहास की पृष्ठभूमि की टोह में इन अवधारणाओं से पुनः दो-चार होते हुए इस संबंध में नई सोच को प्रस्तावित करता है। इस लेख की कई स्थापनाओं से बहस व असहमतियां हो सकती हैं. हम उन बहसों और असहमतियों को सार्थक चर्चा के लिए आमंत्रित करते हैं। -संपादक, हंस

राष्ट्र, राष्ट्र-राज्य और राष्ट्रवाद

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)