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नोम चॉम्स्की

Noam Chomsky

कितना मुक्त है मुक्त बाज़ार

नोम चॉम्स्की

[नोम चॉम्स्की का यह लेख लंदन में दिये गये उनके भाषण का संक्षिप्त अंश है और मुक्त बाज़ार को समझने के लिये बेहद ज़रूरी सूत्र उपलब्ध कराता है।]

ग़ैर-टिकाऊ अविकास

नोम चॉम्स्की

30 मई, 2000

हाल ही में एक वार्ता के दौरान चोम्स्की से पूछा गया "अमरीका द्वारा विकासशील देशों में टिकाऊ विकास पर ज़ोर दिए जाने के क्या उद्देश्य हैं?" उनका जवाब यह था...

प्रॉपेगंडा और मतारोपण

नोम चॉम्स्की

10 दिसंबर, 2000

यह तीन टिप्पणियों में से पहली है जो मैं इस महीने भेजूंगा...इनमें से प्रत्येक डेविड बारसॉमीऑन (डी. बी.) के सवालों का जवाब है और सभी को एक अप्रकाशित साक्षात्कार से लिया गया है...

डी. बी.: एक ऐसे विषय के बारे में बात करते हैं जिस पर हम अक्सर लौटते रहे हैं, और वह है प्रॉपेगंडा और मतारोपण। बतौर एक शिक्षक आप लोगों को खुद सोचने के लिए प्रेरित कैसे कर सकते हैं? क्या आप ऐसा कर पाने के लिए कुछ 'औज़ार' भी दे सकते हैं?

सभ्यताओं का टकराव

5 नवंबर, 2001

हंटिंगटन के सिद्धांत का प्रसंग याद करें जिसमें इसे पेश किया गया था। यह शीत युद्ध के बाद की बात है। पचास साल तक, संयुक्त राज्य तथा सोवियत संघ दोनों ने शीत युद्ध को बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया था, उन सब अत्याचारों के लिए जो वे करना चाहते थे। तो अगर रूसी पूर्वी बर्लिन में टैंक भेजना चाहते थे तो उसका कारण शीत युद्ध था। और अगर अमरीका दक्षिण वियतनाम पर आक्रमण करना चाहता था तथा हिंद-चीन को तबाह करना चाहता था तो वो शीत युद्ध के कारण था। अगर आप इस दौर के इतिहास पर नज़र डालें तो बहाने का कारणों से कोई लेना-देना नहीं था। अत्याचारों के जो कारण थे उनका मूल तो घरेलू सत्ता स्वार्थो

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)