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उंबर्तो इको

Umberto Eco

क्‍या होंगे शक्तिशाली राष्‍ट्रों को लगे इस घाव के नतीजे?

उंबर्तो इको

इस लेख में बताया गया है कि विकिलीक्‍स ने अमेरिका जैसे सर्वशक्तिमान मुल्‍क की डिप्‍लोमेसी को किस तरह नंगा किया है और कोई मुल्‍क जिस गुमान में रहता है, उस गुमान को एक नागरिक की हैसियत से किस तरह तोड़ा जा सकता है। हालांकि नवभारत टाइम्‍स ने जो शीर्षक लगाया है, कैसा रहस्य है जिसके लीक पर इतनी मारामारी उससे एक भ्रम की स्थिति बनती है – लेकिन पूरे लेख का मर्म ये है कि इस लीक से राष्‍ट्राध्‍यक्षों के भविष्‍य का स्‍केच पुराने जासूसी वक्‍तों की तरह खींचा जा सकता है : मॉडरेटर - मोहल्ला लाइव

विकीलीक्स मामले की दोहरी अहमियत है। एक तरफ यह एक बोगस स्कैंडल है। ऐसा स्कैंडल, जिसे स्कैंडल तभी माना जा सकता है, जब इसे सरकार, जनता और प्रेस के रिश्तों में व्याप्त पाखंड की पृष्ठभूमि में देखा जाए। दूसरी तरफ इसमें अंतरराष्ट्रीय संचार व्यवस्था का पश्चगामी भविष्य नजर आ रहा है। ऐसा भविष्य, जिसमें हर नयी टेक्नॉलजी केकड़ों की तरह संचार को पीछे ही पीछे घसीटती जाएगी। इनमें पहले बिंदु को लें तो विकीलीक्स ने इसकी पुष्टि कर दी है कि किसी भी देश की गुप्तचर सेवा जो फाइलें जोड़ती रहती है, उनमें सिर्फ अखबारी कतरनें भरी होती हैं। बर्लुस्कोनी की सेक्स आदतों के बारे में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने जो असाधारण खुलासे अपनी सरकार के पास भेजे हैं, वे महीनों से सबकी जानकारी में थे, और गद्दाफी का जो गंदा कैरिकेचर इन खुफिया फाइलों में नजर आता है, उससे ज्यादा ब्यौरे कैबरे डांसरों की परफॉर्मेंस में मिल जाते हैं।

जासूसी के अड्डे

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)