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अनुपमा

Anupama

एक और दंतेवाड़ा

निराला और अनुपमा

(तहलका से साभार)

यह दंडकारण्य का वह दंतेवाड़ा तो नहीं जहां के एक बड़े हिस्से में माओवादियों द्वारा पीपुल्स गवर्नमेंट का राज चलता है लेकिन एशिया के सबसे बड़े साल के जंगल सारंडा की पिछले दस साल में जैसी हालत हो गई है, उसे दूसरा दंतेवाड़ा कहना गलत नहीं होगा. निराला और अनुपमा की यह विशेष रिपोर्ट 

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)