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अनिल सिन्हा

अमेरिकी पुलिस का लोकतंत्र

अनिल सिन्हा

अमेरिकी सैनिकों की बर्बरता व क्रूरता से आज पूरी दुनिया परिचित है। ऐसा शायद ही कोई दिन होता हो जब अमेरिकी सैनिक दुनिया के किसी न किसी हिस्से में अपने करतब न दिखा रहे हों। दरअसल उनका प्रशिक्षण ही ऐसा है कि उन्हें ट्रिगर, बैरल, बम राकेट आदि के सामने जो भी दिखाई देता है, चाहे वह आदमी हो या प्रांतर, उसे उड़ा देना है, उसे नेस्तनाबूद कर देना है। यह ट्रेनिंग उन्हें तब से मिलती आ रही है जब कोलम्बस ने अमेरिका की खोज की थी और वहां के मूल निवासियों को नेस्तनाबूद करते हुए ब्रितानी, मेक्सिकन आदि साम्राज्यवादियों के लिए यहां का रास्ता खोल दिया था। हॉवर्ड जिन जैसे अमेरिकी लेखक ने इस स्थिति को बड़े प्रमाणिक और तथ्यपूर्ण ढंग से अपनी किताब ‘पीपुल्स हिस्ट्री आफ अमेरिका’ में लिखा है। सैनिकों की बात छोड़ दें तो अमेरिकी पुलिस और जितनी तरह के सुरक्षाकर्मी हैं, जैसे- इमिग्रेशन आफिसर, रेल पुलिस, सिविल पुलिस आदि कानून लागू करने के नाम पर हिंसा और बर्बरता की हद पार करते हुए दिखाई देते हैं। फोमांट (कैलीफोर्निया, अमेरिका) से लौटते हुए मुझे कुछ महीने बीत गए हैं, पर वहां की पुलिस की बर्बरता मेरी आंखों के सामने बार बार नाच उठती है। किस हद तक जातीय द्वेष-

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)