Increase |  Decrease |  Normal

Current Size: 100%

Share this
Syndicate content

ओ जर्मनी, म्लान माँ!

बर्तोल्त ब्रेख़्त

औरों को बोलने दो उसकी शर्म के बारे में,
मैं तो अपनी शर्म के बारे में बोलता हूँ।

ओ जर्मनी, म्लान माँ!
तुम कितनी मैली हो
अब जबकि तुम बैठी हो
और इतरा रही हो
कीचड़ सनी भीड़ में।

तुम्हारा सबसे गरीब पुत्र
बेजान होकर गिर पड़ा।
जब भूख उसकी बर्दाश्त से बाहर हो गई।
तुम्हारे अन्य पुत्रों ने
अपने हाथ उसके खिलाफ़ उठा दिए।
यह तो कुख्यात है।

अपने हाथ इस तरह उठा कर,
अपने ही भाई के विरुद्ध,
वो तुम्हारे चारों तरफ़ घूमते हैं
और तुम्हारे मुँह पर हँसते हैं।
यह भी सर्वज्ञात है।

तुम्हारे घर में
दहाड़ कर झूठ बोले जाते हैं
लेकिन सच को
चुप रहना होगा
क्या ऐसा ही है?

क्यों उत्पीड़क तुम्हारी प्रशंसा करते हैं दुनिया भर में,
क्यों उत्पीड़ित निंदा करते हैं?
जिन्हें लूटा गया
तुम्हारी तरफ़ उंगली उठाते हैं, लेकिन
लुटेरा उस व्यवस्था की तारीफ़ करता है
जिसका अविष्कार हुआ तुम्हारे घर में!

जिसके चलते हर कोई तुम्हें देखता है
अपनी ओढ़नी का किनारा छुपाते हुए, जो कि खून से सना है
उसी खून से जो
तुम्हारे ही पुत्रों का है।

तुम्हारे घर से उग्र भाषणों की प्रतिध्वनि को सुन कर,
लोग हँसते हैं।
पर जो भी तुम्हें देखता, अपनी छुरी पर हाथ बढ़ाता है
जैसे कोई डाकू देख लिया हो।

ओ जर्मनी, म्लान माँ!
क्या तुम्हारे पुत्रों ने तुम्हें मजबूर कर दिया है
कि तुम लोगों के बीच बैठो
तिरस्कार और भय की वस्तु बन कर!


अंग्रेज़ी से अनुवाद: अनिल एकलव्य


लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)