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बर्तोल्त ब्रेख़्त

Bertolt Brecht

700 बुद्धिजीवियों की एक तेल की टंकी से प्रार्थना

बर्तोल्त ब्रेख़्त

1

बिना न्योते के
हम आ पहुँचे हैं
700 (और बहुतेरे अभी राह पर हैं)
हर कहीं से, जहाँ अब हवा नहीं बहती है
चक्कियों से, जो पस्त पीसती जाती हैं, और
अलावों से, जिनके बारे में कहा जाता है
अब वहाँ कुत्ता भी मूतने नहीं जाता।


2

और हमने तुम्हें देखा
अचानक
ओ तेल की टंकी!


3

अभी कल ही तुम नहीं थी
लेकिन आज
बस तुम ही तुम हो।


4

जल्दी करो, लोगो!
उस डाल को काटने वाले, जिस पर तुम बैठे हो
कामगारो!
भगवान फिर से आ चुके हैं
तेल की टंकी के भेस में।


5

ओ बदसूरत!
तुमसे ख़ूबसूरत कोई नहीं।
चोट करो हम पर
ओ समझदार !
ख़त्म कर दो मैं की भावना!
हमें समूह बना डालो!
वैसा कतई नहीं, जैसा हम चाहते हैं :
बल्कि जैसा कि तुम चाहती हो।


6

तुम हाथीदाँत की नहीं बनी हो
आबनूस की भी नहीं, बल्कि
लोहे की!
लाजवाब! लाजवाब! लाजवाब!
तुम निरभिमान!


7

तुम अदृश्य नहीं
तुम अनंत नहीं !
तुम सात मीटर ऊँची हो।
तुम में कोई रहस्य नहीं
बल्कि तेल है।
और हमसे तुम्हारा नाता
भावनात्मक या दुर्बोध नहीं
बल्कि हिसाब के बिल के मुताबिक है।


8

घास क्या है तुम्हारे लिए?
तुम उस पर बैठती हो।
जहाँ कभी घास थी
अब तुम विराजमान हो, ओ तेल की टंकी!
और भावनाएँ तुम्हारे लिए
कुछ भी नहीं हैं!


9

इसलिए हमारी सुनो
और हमें चिंतन के पाप से मुक्ति दिलाओ।
बिजलीकरण के नाम पर
प्रगति और आंकड़ों के नाम पर।

रचनाकाल : 1927


मूल जर्मन भाषा से अनुवाद : उज्ज्वल भट्टाचार्य

नर्क का ध्यान

बर्तोल्त ब्रेख़्त

नर्क का ध्यान करते हुए, जैसा कि एक बार मैंने सुना था,
मेरे भाई शेली ने उसे एक ऐसी जगह पाया था
जो काफ़ी कुछ लंदन जैसी ही है। मैं,
जो लंदन में नहीं रहता, बल्कि लॉस एंजेलेस में रहता हूँ,
पाता हूँ, नर्क का ध्यान करने पर, कि यह
और भी अधिक लॉस एंजेलेस जैसी ही होनी चाहिए।

और नर्क में ही,
मुझे कोई शक नहीं है, ऐसे शानदार बाग हैं
जहाँ फूल इतने बड़े होते हैं जितने पेड़, मुरझाते हुए,जाहिर है,
बहुत जल्दी, अगर उन्हें अत्यंत मँहगे पानी से न सींचा जाए। और फलों के बाज़ार
फलों के भारी ढेरों के साथ, जिनमें कि इस सबके बावजूद

न तो कोई महक होती है न ही स्वाद। और मोटरों की अंतहीन कड़ियाँ,
अपनी छायाओं से भी हल्की, और दौड़ते हुए
मूढ़ विचारों से भी अधिक तेज़, झिलमिलाते वाहन, जिनमें
गुलाबी लोग, न कहीं से आते हुए, न कहीं जाते हुए।
और मकान, खुशी के लिए प्रारूपित, खाली पड़े हुए,
तब भी जब बसे हुए।

नर्क के भी घर सब इतने तो बदसूरत नहीं होते।

एक जर्मन युद्ध पुस्तिका से

बर्तोल्त ब्रेख़्त

ऊँची जगहों पर आसीन लोगों में
भोजन के बारे में बात करना अभद्र समझा जाता है।
सच तो यह है: वो पहले ही
खा चुके हैं।

जो नीचे पड़े हैं, उन्हें इस धरती को छोड़ना होगा
बिना स्वाद चखे
किसी अच्छे माँस का।

यह सोचने-समझने के लिए कि वो कहाँ से आए हैं
और कहाँ जा रहे हैं
सुंदर शामें उन्हें पाती हैं
बहुत थका हुआ।

उन्होंने अब तक नहीं देखा
पर्वतों को और विशाल समुद्र को
और उनका समय अभी से पूरा भी हो चला।

अगर नीचे पड़े लोग नहीं सोचेंगे
कि नीचा क्या है
तो वे कभी उठ नहीं पाएंगे।

भूखे की रोटी तो सारी
पहले ही खाई जा चुकी है

माँस का अता-पता नहीं है। बेकार है
जनता का बहता पसीना।
कल्पवृक्ष का बाग भी
छाँट डाला गया है।
हथियारों के कारखानों की चिमनियों से
धुआँ उठता है।

ओ जर्मनी, म्लान माँ!

बर्तोल्त ब्रेख़्त

औरों को बोलने दो उसकी शर्म के बारे में,
मैं तो अपनी शर्म के बारे में बोलता हूँ।

ओ जर्मनी, म्लान माँ!
तुम कितनी मैली हो
अब जबकि तुम बैठी हो
और इतरा रही हो
कीचड़ सनी भीड़ में।

तुम्हारा सबसे गरीब पुत्र
बेजान होकर गिर पड़ा।
जब भूख उसकी बर्दाश्त से बाहर हो गई।
तुम्हारे अन्य पुत्रों ने
अपने हाथ उसके खिलाफ़ उठा दिए।
यह तो कुख्यात है।

अपने हाथ इस तरह उठा कर,
अपने ही भाई के विरुद्ध,
वो तुम्हारे चारों तरफ़ घूमते हैं
और तुम्हारे मुँह पर हँसते हैं।
यह भी सर्वज्ञात है।

तुम्हारे घर में
दहाड़ कर झूठ बोले जाते हैं
लेकिन सच को
चुप रहना होगा
क्या ऐसा ही है?

क्यों उत्पीड़क तुम्हारी प्रशंसा करते हैं दुनिया भर में,
क्यों उत्पीड़ित निंदा करते हैं?
जिन्हें लूटा गया
तुम्हारी तरफ़ उंगली उठाते हैं, लेकिन
लुटेरा उस व्यवस्था की तारीफ़ करता है

मैक चाकू

बर्तोल्त ब्रेख़्त

(कुर्त वाइल के साथ ‘थ्री पेनी ओपेरा’ के लिए)

अरे, शार्क के दाँत बड़े सलोने हैं, प्यारे
और वो उन्हें दिखाती है मोती सी चमक से।
मकीथ के पास बस एक चाकू है, प्यारे
और वो उसे रखता है दूर सबकी नज़र से।

जब शार्क काटती है अपने दाँतों से, प्यारे
तो लाली लहरा के शुरू होती है फैलना।
मँहंगे दस्ताने, मगर, मकीथ पहने है, प्यारे
ताकि लाली का नामो-निशान मिले ना।

फुटपाथ पर इतवार की सुबह
एक शरीर से ज़िंदगी रिसती है;
नुक्कड़ पर कोई मंडरा रहा है
क्या ये वही मैक शैली चाकू है?

नदी तट पर एक कर्षण नौका से
एक सीमेंट की बोरी गिरी जा रही है;
सीमेंट तो बस वज़न के लिए है, प्यारे।
हो न हो मैकी शहर में लौट आया है।

और लुई मिलर गायब हो गया है, प्यारे
अपनी सारी नकदी-वकदी निकाल कर;
और मकीथ नाविक के जैसे पैसा उड़ाए है।
क्या भाई ने कुछ कर दिया है जोश में आकर?

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)