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नज़ीर अकबराबादी

Nazir Akbarabadi

आदमी नामा

नज़ीर अकबराबादी

(1)

दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी

और मुफ़लिस-ओ-गदा है सो है वो भी आदमी

ज़रदार बेनवा है सो है वो भी आदमी

निअमत जो खा रहा है सो है वह भी आदमी

टुकड़े चबा रहा है सो है वो भी आदमी

(2)

मस्जिद भी आदमी ने बनाई है यां मियाँ

बनते हैं आदमी ही इमाम और खुतबाख्‍वाँ

पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां

और आदमी ही चुराते हैं उनकी जूतियाँ

जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी

(3)

यां आदमी पै जान को वारे है आदमी

और आदमी पै तेग को मारे है आदमी

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लेखक विषय संवाद साभार अनुवादक

पहले वो आए साम्यवादियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

 

फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

 

फिर वो यहूदियों के लिए आए

और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

 

फिर वो आए मेरे लिए

और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

 

मार्टिन नीमोलर (1892-1984)